[Shivratri 2020] भगवान शिव के माता पिता कौन है।
[Shivratri 2020] भगवान शिव के माता पिता कौन है।
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WHO IS THE FATHER OF BHRAMA, VISHNU AND MAHESH |
शिव, ब्रह्मा और विष्णु के माता पिता का वर्णन दुर्गा पुराण में मिलता है।
दुर्गा पुराण में एक प्रकरण हैं जब समुद्र मंथन से वेद बाहर आए तब ब्रह्मा जी को वेद दिए गए । फिर जब ब्रह्मा जी ने वेद पढ़े तो उन्होंने वेदों में पड़ा कि वह काल (निरंजन, ब्रह्मा विष्णु महेश का पिता) को ओम जाप से प्राप्त ह
किया जा सकता है।वेदों में यह पढ़कर ब्रह्मा जी अपनी माता दुर्गा के पास आए और बोले कि हे मां मुझे अपने पिता के दर्शन करने हैं तो दुर्गा ने कहा कि वह निरंजन तुम्हारा पिता है वह किसी को किसी भी विधि से दर्शन नहीं देता। तब ब्रह्माजी ने हट किया और तपस्या करने का निर्णय लिया फिर ब्रह्मा जी ने चार योग अपने पिता के दर्शन के लिए तप किया पर कोई फायदा नहीं हुआ फिर ब्रह्मा जी दुर्गा के पास आए और उन्होंने झूठ कहा कि उन्हें अपने पिता के दर्शन हो गए तब दुर्गा को काल(निरंजन) की आकाशवाणी हुई। तो उसने कहा कि ब्रह्मा झूठ बोल रहा है मैंने किसी को कोई दर्शन नहीं दिए इस बात से दुर्गा ने गुस्सा होकर ब्रह्मा को श्राप दे दिया। फिर दुर्गा माता अपने दूसरे पुत्र विष्णु के पास गई और उससे बोली कि तुम्हारे बड़े भाई ब्रह्मा को अपने पिता के दर्शन नहीं हुए अगर तुम भी सोचते हो कि तुम तपस्या कर कर अपने पिता के दर्शन कर लोगे तो अभी प्रयत्न कर लो क्योंकि बाद में सृष्टि रचना करनी है तब तुम उस समय बाधक मत बनना तब विष्णु जी ने तपस्या करने का निर्णय लिया तब विष्णु जी तपस्या करने के लिए शेषनाग के लोक में पहुंचे तब, शेषनाग जी ने विष्णु जी को अपने लोग में बिना अनुमति आते देख क्रोध आ गया। फिर शेषनाग जी ने अपने हजार फलों से जहर छोड़ दिया जो कि चारों ओर धूएं की तरह फैल गया जिस कारण विष्णु जी का के शरीर का रंग काला पड़ गया। विष्णु जी को यह देखकर क्रोध आया जब वह शेषनाग पर प्रहार करने वाले ही थे तभी आकाशवाणी हुई। कि है विष्णु मैं तुम्हारा पिता बोल रहा हूं तुम इस शेषनाग से मत लड़ो इसकी इस गलती का बदला तुम कृष्ण के रूप में लेना और जाओ अपनी माता दुर्गा से सच सच कह दो कि मुझे अपने पिता के दर्शन नहीं हुए नहीं तो तुम्हारा भी ब्रह्मा जैसा हाल होगा मैं तुम्हारा पिता हूं मैं तुम्हें कभी भी दर्शन नहीं दूंगा यह मेरा घटिया और अटल नियम है। इस आकाशवाणी को सुनकर विष्णु जी माता दुर्गा के पास पहुंचे और उन्होंने सच-सच सब कुछ बता दिया इस बात से मां दुर्गा माता बड़ी प्रसन्न हुई और उन्होंने विष्णु जी को वरदान दिया फिर माता दुर्गा अपने तीसरे पुत्र शिव के पास पहुंची और कहा। हे पुत्र तेरे दोनों बड़े भाइयों को अपने पिता के दर्शन नहीं हुए अगर तू भी अपने पिता के दर्शन करने के लिए कुछ प्रयत्न करना चाहता है तो अभी कर ले बाद में सृष्टि रचना में बाधक मत बनना। इस बात को सुनकर शिवजी वोले की। है माता अगर मेरे दोनों भाइयों को दर्शन नहीं हुए तो मैं तो प्रयत्न ही नहीं करता पर मां मुझे एक वरदान दे कि मैं अमर हो जाऊं। तब दुर्गा जी ने कहा कि तू अमर नहीं हो सकता यह तो इस सृष्टि का नियम है जो जहां पैदा होता है उसकी मृत्यु भी निश्चित ही होती है पर मैं तुझे एक विधि बता देती हूं कि जिससे तेरी उम्र तेरे दोनों भाइयों से लंबी हो जाएगी पर तेरी मृत्यु समाप्त नहीं होगी|
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Durga puran |
यह सारा प्रकरण दुर्गा पुराण में दिया गया है।


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